सांख्यिकी { Statistics } [ कक्षा 10, अध्याय 14 ]

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* केंद्रीय प्रवृत्ति के मापक - आँकड़ों के संख्यात्मक प्रतिनिधि (माध्य, माध्यक और बहुलक) को केंद्रीय प्रवृत्ति के मापक कहा जाता है।
* दिए गए आँकड़ों का माध्य (औसत) ज्ञात करने के लिए सभी आँकड़ों के योग को उनकी संख्या से भाग दिया जाता है।
माध्य = प्रेक्षणों का योग / प्रेक्षणों की संख्या
* माध्य (mean) को विभिन्न नामों से जाना जाता है, माध्य, समांतर माध्य, मध्यमान, औसत।
* जब अवर्गीकृत आँकड़े ज्यादा हों तो उन्हें सरल करने के लिए वर्ग अंतराल बनाकर वर्गीकृत आँकड़ों में बदला जाता है, फिर प्रत्येक वर्ग अंतराल से के वर्ग चिन्ह ज्ञात किये जाएँगे।
* वर्ग चिन्ह - वर्ग अंतराल का वह मध्य बिंदु (मान) जो पूरे वर्ग अंतराल का प्रतिनिधित्व करे।
वर्ग चिन्ह = (वर्ग अंतराल की निम्न सीमा + वर्ग अंतराल की उपरि सीमा)/2
नोटः  वर्ग अंतराल बनाते समय ध्यान रखें कि किसी उपरि वर्ग सीमा में आने वाले प्रेक्षण अगले वर्ग अंतराल में लिए जाते हैं। जैसे 30 को 20-30 वर्ग अंतराल में न लेकर 30-40 में लिया जाएगा।


* प्रत्यक्ष विधि से माध्य ज्ञात करने के चरण :-

(i) आँकड़ों को आरोही क्रम (बढ़ता क्रम) में लिखो।
(ii) आँकड़ों के वर्ग अंतराल बनाओ या दिए हों।
(iii) सभी वर्ग अंतरालों के वर्ग चिन्ह (xi) ज्ञात करो।
(iv) सभी वर्ग चिन्हों (xi) को संगत बारंबारता (fi) से गुणा करके fixi ज्ञात करो।
(v) सभी fixi का योग करो।
(vi) सभी fi का योग करो।
(vii) fixi के योग को fi के योग से भाग देने पर प्राप्त संख्या ही आँकडों का माध्य होगा।
                   



* जब (xi) और (fi) के मान ज्यादा बड़े होते हैं तो गुणा करने में अधिक समय लगता है, इसके लिए हम कल्पित माध्य विधि का प्रयोग करते हैं।

* कल्पित माध्य विधि से माध्य ज्ञात करने के          चरण :-

(i) वर्ग अंतराल बनाओ या दिए हों।
(ii) वर्ग चिन्ह (xi) ज्ञात करो।
(iii) सभी (xi) में से किसी एक (xi) को कल्पित माध्य (assumed mean) के रूप में चुने जो आँकड़ों के लगभग मध्य में हो। इस कल्पित माध्य को (a) से दर्शाते हैं।
(iv) प्रत्येक वर्ग चिन्ह (xi) से कल्पित माध्य (a) का विचलन (deviation) ज्ञात करो।
di = xi - a
(v) सभी विचलनों (di) को संगत बारंबारता (fi) से गुणा करके fidi ज्ञात करो।
(vi) सभी fi और fidi का योग ज्ञात करो।
(vii) fidi के योग को fi के योग से भाग देकर कल्पित माध्य (a) जोड़ दो, यही आँकड़ों का माध्य है।
                       
                             या
                   



* अगर सभी fidi के योग को fi के योग से भाग दें तो विचलनों का माध्य प्राप्त होता है।
* आँकड़ों के माध्य में से कल्पित माध्य (a) को घटाने पर विचलनों का माध्य प्राप्त होता है।
* विचलनों के माध्य में कल्पित माध्य जोड़ दें तो आँकड़ों का माध्य प्राप्त हो जाता है।
* जब di का मान अधिक बड़ी संख्याएँ हों तो हम माध्य पग-विचलन विधि से ज्ञात करते हैं।

* पग-विचलन विधि से माध्य ज्ञात करने के चरण :-

(i) वर्ग अंतराल बनाओ या दिए हों।
(ii) वर्ग चिन्ह (xi) ज्ञात करो।
(iii) प्रत्येक वर्ग चिन्ह (xi) से कल्पित माध्य (a) का विचलन (di) ज्ञात करो।
(iv) सभी di में किसी ऐसी संख्या (h) से भाग देते हैं, जिससे कि सभी di में पूरा-पूरा भाग चला जाए। इससे प्राप्त भागफल को (ui) लिखते हैं।
                     
(v) सभी ui को संगत fi से गुणा करके fiui ज्ञात करो।
(vi) सभी fi और सभी fiui के योग ज्ञात करो।
(vii) सभी fiui के योग को fi के योग से भाग दो फिर भागफल को भाजक (h) से भाग दो और फिर कल्पित माध्य (a) जोड़ दो, यही आँकड़ों का माध्य है।
                     
                              या
                  



* सभी fiui के योग को fi के योग से भाग देकर ui का माध्य प्राप्त होता है।
* पग-विचलन विधि तभी सरल और सुविधाजनक होती है जब सभी di में कोई सार्व गुणनखंड हो।
* तीनों विधियों से एक ही मान प्राप्त होता है।
* कल्पित माध्य विधि और पग-विचलन विधि प्रत्यक्ष विधि के ही सरल किए हुए रूप हैं।
* बहुलक - आँकड़ों में में जिस पद (मान) की पुनरावृत्ति (बारंबारता) सबसे अधिक हो, उसे आँकड़ों का बहुलक कहते हैं।
* बहुबहुलकीय आँकड़े - जब आँकड़ों में दो या दो से अधिक मानों की बारंबारता अधिकतम (maximum) आती हो, उन आँकड़ों को बहुबहुलकीय आँकड़े कहा जाता है।
* वर्गीकृत बारंबारता बंटन में, बारंबारताओं को देखकर बहुलक ज्ञात करना सम्भव नहीं है। इससे केवल बहुलक वर्ग (modal class) ज्ञात कर सकते हैं, जिस वर्ग की बारंबारता अधिकतम है। बहुलक वर्ग में स्थित कोई मान ही आँकड़ों का बहुलक कहलाता है, जिसे निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जाता है -
बहुलक = 

सूत्र में,
l = बहुलक वर्ग की निम्न या निचली सीमा
f1 = बहुलक वर्ग की बारंबारता
f0 = बहुलक वर्ग के पहले वाले वर्ग की बारंबारता
f2 = बहुलक वर्ग के बाद वाले वर्ग की बारंबारता
h = वर्ग अंतराल की माप



* माध्यक - केंद्रीय प्रवृत्ति का वह मापक जो आँकड़ों के बिल्कुल बीच के प्रेक्षण का मान देता है।
* अवर्गीकृत आँकड़ों का माध्यक ज्ञात करने के लिए सबसे पहले आँकड़ों को आरोही क्रम में लिखते हैं फिर यदि प्रेक्षणों की संख्या विषम हैं, तो निम्न सूत्र द्वारा माध्यक ज्ञात किया जाता है -
माध्यक = 

n = प्रेक्षणों की संख्या
और यदि आँकड़ों की संख्या सम है, तो इस सूत्र से  माध्यक ज्ञात किया जाता है।
माध्यक = 



* संचयी बारंबारता - संचयी बारंबारता दो या दो से अधिक बारंबारताओं का जोड़ होता है।
* कम प्रकार का संचयी बारंबारता बंटन - वह सारणी (बंटन) जिसमें उपरि सीमाओं से कम बारंबारताएँ दर्शाई जाती हैं। जैसे 20 से कम, 40 से कम, 60 से कम आदि।
* अधिक प्रकार का संचयी बारंबारता बंटन - वह सारणी (table) जिसमें निम्न सीमाओं से अधिक बारंबारताएँ दर्शाई जाती हैं। जैसे 10 से अधिक, 20 से अधिक, 30 से अधिक आदि।



* वर्गीकृत आँकड़ों से माध्यक ज्ञात करने के          चरण :-

(i) सभी वर्गों की संचयी बारंबारता ज्ञात करो।
(ii) माध्यक वर्ग ज्ञात करो, जिसमें माध्यक स्थित है। जिस वर्ग की संचयी बारंबारता n/2 से अधिक और निकटतम होगी वही माध्यक वर्ग होगा।
(iii) माध्यक वर्ग ज्ञात हो जाने के बाद इस सूत्र के प्रयोग से आँकड़ों का माध्यक ज्ञात किया जाता है
माध्यक = 

सूत्र में,
l = माध्यक वर्ग की निम्न सीमा
n = प्रेक्षणों की संख्या
cf = माध्यक वर्ग से पहले वाले वर्ग की संचयी                    बारंबारता
f = माध्यक वर्ग की बारंबारता
h = वर्ग माप



* माध्य, केंद्रीय प्रवृत्ति के मापकों में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाला मापक है, क्योंकि यह सभी प्रेक्षणों पर आधारित होता है।
* केंद्रीय प्रवृत्ति के मापकों में एक विशेष सम्बंध होता है, जो निम्नलिखित है -
3 माध्यक = बहुलक + 2 माध्य

* कम प्रकार का बारंबारता वक्र बनाने के चरण :-

(i) वर्ग अंतरालों की उपरि सीमाओं को एक उचित पैमाना लेकर x-अक्ष पर अंकित करो।
(ii) संचयी बारंबारताओं को y-अक्ष पर वही या कोई अन्य पैमाना लेकर अंकित करो।
(iii) सभी बिंदुओं को मिलाओ।
(iv) बिंदुओं के मेल से प्राप्त हुई वक्र से कम प्रकार की एक संचयी बारंबारता (cumulative frequency curve) या तोरण (ogive) कहलाती है।
Note : दोनों अक्षों के लिए समान पैमाना लेना आवश्यक नहीं है।



* अधिक प्रकार का बारंबारता वक्र बनाने के           चरण :-

(i) वर्ग अंतरालों की निम्न सीमाओं को x-अक्ष पर उचित पैमाना लेकर अंकित करो।
(ii) संचयी बारंबारताओं को y-अक्ष पर वही या कोई अन्य पैमाना लेकर अंकित करो।
(iii) सभी बिंदुओं को मिलाओ।
(iv) बिंदुओं के मेल से प्राप्त वक्र से अधिक प्रकार की एक संचयी बारंबारता वक्र या तोरण कहलाती है।
* 'से कम प्रकार' और 'से अधिक प्रकार' के तोरणों में एक सम्बंध है, जिसके माध्यम से हम माध्यक ज्ञात कर सकते हैं -
दोनों तोरणों को एक ही तल में खींचने पर जिस बिंदु पर ये प्रतिच्छेद करते हैं, उस बिंदु से x-अक्ष पर लंब डालते हैं और जिस बिंदु पर यह लंब x-अक्ष को काटता है, वही आँकड़ों का माध्यक होता है।

All Mathematics Chapters Notes for 10th standard :-

अध्याय - 1 वास्तविक संख्याए
अध्याय  2  बहुपद
अध्याय  3  दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म
अध्याय  4  द्विघात समीकरण
अध्याय  5  समांतर श्रेढ़ी
अध्याय  6  त्रिभुज
अध्याय  7  निर्देशांक ज्यामिति
अध्याय  8  त्रिकोणमिति का परिचय
अध्याय  9  त्रिकोणमिति के कुछ अनुप्रयोग
अध्याय  10  वृत्त
अध्याय  11  रचनाएँ
अध्याय  12  वृत्तों से संबंधित क्षेत्रफल
अध्याय  13  पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन
अध्याय  14  सांख्यिकी
अध्याय  15  प्रायिकता

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